भाभी चोदन कहानी में पढ़ें कि मैं एक भाभी को चोदता था. वे मुझे अपने साथ अपने मायके ले गयी थी. मायके में भी मैंने उन्हें चोवदा. जब हमें घर में एकांत मिला तो हमने खुल कर चुवदावई की.
मेरी कमसिन चूवती वाली सहेलियो और मेरे दोस्तो, मेरा नाम योगू है. अभी मैं वर्क फ्राम होम कर रहा हूँ.
आज की सेमक्ष कहानी मेरे और मेरी भरी हुई गांवड और बड़े बड़े बूब वाली भाभी के बीच हुई चुवदावई की कहानी है.
भाभी का फिगर 38-32-42 का है.
आप कल्पना करके देखो कि इस फिगर वाली महिला को किस तरह से चोवदा जा सकता है.
उनको कल्पना में ही याद करके उनकी मस्त जवानी से मर्दों का जोश कितना उफनता होगा.
भाभी को सोचने पर ही मेरा तो लमण्ड पूरा खड़ा हो जाता है.
आपने मेरी पिछली सेमक्ष स्टोरी
भाभी की चूवती को उसके मायके में जाकर चोवदा
में पढ़ा था कि कैसे मैंने भाभी के साथ उनके मायके में उनको चोवदा था.
अब आगे Xxx भाभी चोदन कहानी:
जब मैं सुबह नहा धोकर तैयार हो रहा था तो उसी दरमियान भाभी मेरे साथ लगातार हंसी मजाक करती हुई मुझे उकसा रही थीं.
मैंने भी देखा कि आस पास कोई नहीं है, तो उनको पीछे से अपनी बांहों में लेकर दबोच लिया और उनके बड़े बड़े मम्मों को आटे के जैसे गूँथने लगा.
वे भी मूड में थीं तो मेरे लमण्ड को अपनी गांवड से मसलने लगीं.
मैं और भाभी अब पूरे मस्त होकर एक दूसरे के बदन का सुख ले रहे थे.
मैंने उनकी एक चूची को मसलते हुए पूछा- आज तो सुबह सुबह से बिंदास हो रही हो भाभी … क्या बात है? क्या मम्मी पापा का डर खत्म हो गया है?
भाभी ने बताया कि उनकी मम्मी और पापा जी को अचानक ही किसी की मृत्यु के कारण बाहर जाना था, तो वे दोनों सुबह से ही चले गए.
यह सुनकर मैं समझ गया कि अब घर में सिर्फ मैं और भाभी ही बचने वाले थे.
अब हम दोनों की आंखों में बहुत कामुकता और शैतानी बढ़ने लगी.
मैंने उसी पल घर के मुख्य दरवाजे को बंद कर दिया और भाभी के पास आ गया.
हम दोनों एक-दूसरे को वासना से भूखी नजरों से देखने लगे.
अगले ही पल एक दूसरे को बांहों में जकड़ कर एक दूसरे को मस्त होकर चूमने चूसने लगे.
मेरी जीभ और भाभी की जीभ एक दूसरे के मुँह में लेकर हम दोनों स्मूच करने लगे.
मैंने उनकी गदरायी गांवड को जोर से मसलते और थपथपाते हुए भींचना शुरू कर दिया.
वे भी मेरे साथ जोर से चिपक कर मुझे मसलने लगीं.
जैसे ही हम दोनों ने अपना चुंबन तोड़ा, मैं झट से उनके बड़े बड़े स्तनों को मसलते हुए उनकी गहरी नाभि और मांसल पेट को चूमने चाटने लगा.
वे भी जोर जोर से आहें भरने लगीं; मेरे सर में हाथ घुमाते हुए मेरे बालों को खींच कर अपनी ओर दबाने लगीं.
इधर मैंने नीचे से भाभी की साड़ी को उठाते हुए अन्दर हाथ डाला और सहलाते हुए उनकी जांघों को मसलने और सहलाने लगा.
भाभी की भरी हुई मांसल जांघों को मैं मस्त होकर सहलाते हुए ही अपनी गर्म गर्म सांसें छोड़ता जा रहा था जिससे भाभी सिहर रही थीं और उनकी जांघों की सिहरन से मुझे मजा आ रहा था.
मैंने उन्हें लिटा दिया और उनकी जांघों को चूमने लगा, उसी जगह से चाटते हुए ऊपर चूवती की तरफ बढ़ने लगा.
मुँह के साथ मेरा हाथ भी भाभी की गदारायी गांवड को दबा रहा था.
उनकी गांवड की लकीर में मैं उंगली से छेड़खानी करने लगा.
भाभी जोर जोर से आहें भरती हुई मेरे मुँह को चूवती की ओर दबाने लगीं.
उनकी चूवती की मादक महक ने मेरे लमण्ड में और ज्यादा आग लगाने का काम करना शुरू कर दिया था.
मैंने झट से उनकी पैंटी निकाली और चूवती पर अपनी जीभ से एक बार चाट कर उनकी चूवती को झटका लगा दिया.
भाभी अपना बदन सिहराते हुए मेरा सर जोर से चूवती पर दबाने लगीं.
मैंने उनकी आंखों में देखा और पूरी जीभ उनकी रस टपकाती चूवती में पेल दी.
भाभी की आह निकली और मैंने उसी समय उनकी चूवती की फाँकों को चीरते हुए जीभ को चूवती में घुसा दी.
मैं अपनी जीभ को ऐसे अन्दर बाहर करने लगा मानो कोई कुत्ता पानी पीते समय जीभ लपलपाता है.
भाभी जोर जोर से मस्त होकर मेरे बालों को खींचने लगीं.
उनके मुँह से ‘आहह आह योगू … ओह बेबी यस यस आह …’ निकलने लगा.
मैंने झट से अपने सीधे हाथ की बीच वाली फिंगर उनकी गांवड में घुसा दी.
तब वे और जोर से कसमसाती हुई मेरे सामने छटपटाने लगीं.
उनके मुँह से बस कामुक आहें निकल रही थीं- आह आह … ओह बस यॉगू आह ओहम!
मैं भी अब जोर जोर से अपनी जीभ को उनकी चूवती को चाटने लगा और हाथ से गांवड को कचाकचा कर मसलने लगा.
वे भी 69 में हुईं और मुझे नंगा करके मेरे लमण्ड को सहलाने लगीं.
भाभी ने जैसे ही मेरे लमण्ड को पकड़ा, मैंने एक फुरफुरी सी ली और उसी पल भाभी ने लौड़े पर अपनी जीभ लगा दी.
भाभी ने अगले ही कुछ पलों में मेरे लमण्ड को अपने मुँह में गप कर लिया और उसे चूसना चालू कर दिया.
उन्होंने मेरे लौड़े को अपने मुँह में जितना हो सकता था, अन्दर लेकर चूसना शुरू कर दिया.
मैं भी उनकी गांवड पर चांटे मारते हुए एक चूवतीड़ को थपथपाने लगा.
अब हम दोनों को इस पोज में बहुत ज्यादा वासना चढ़ने लगी थी.
मैंने झट से पोजीशन बदली और उनको अपने नीचे लिटा लिया, उनके बड़े बड़े मम्मों को मसलते हुए उनके रसभरे होंठों को चूमने लगा, उसी पल जीभ मुँह में ठेल दी.
आह स्मूच करते ही हम दोनों को एक दूसरे की जीभ में लगा एक दूसरे के लमण्ड चूवती का स्वाद मिलने लगा.
नीचे मैं उनकी जांघों को अपनी जांघों से रगड़ कर लमण्ड को चूवती की लकीर से टच कराने लगा.
वे कसमसाती हुई छटपटाने लगीं.
अपनी कसमसाहट को वे मेरे होंठों से निकालने लगीं मेरे होंठ चूसते हुए मजा लेने लगीं.
मैंने उनकी आंखों में देखते हुए उनकी चूवती में लमण्ड को सैट करने लगा.
जैसे ही लमण्ड ने चूवती का मुँह अपने निशाने पर लिया, उसी समय मैं एक हल्के से धक्के के साथ चूवती में लमण्ड डालने लगा.
भाभी ने भी चूवती खोल दी. फिर जैसे ही मैंने सुपारा अन्दर पेला, भाभी की एक मादक कराह निकल गई.
मैं धीरे धीरे चूवती में अपना लमण्ड घुसाने लगा.
वे जोर से कस कर पकड़कर मेरे मुँह में मुँह डालकर चूस रही थीं. साथ ही भाभी मेरी गांवड को दबा रही थीं और मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ाती हुई मचल रही थीं.
साथ ही भाभी नीचे से अपनी गांवड उठा कर मेरे लमण्ड को पूरा अन्दर लेकर चुदवाने लगी थीं.
हम दोनों उस समय मिशनरी पोज में थे और मस्त होकर एक दूसरे को मस्त कसके जकड़े हुए थे. हमारे लमण्ड और चूवती दोनों अपनी अपनी आग बुझाने में जुट गए थे.
आपको सच बताऊँ, इस पोज में मर्द और औरत के बदन सबसे ज्यादा एक दूसरे से घिसते हैं.
ज्यादा से ज्यादा बदन घिसने से बहुत अच्छा संगम होता है.
ऐसे ही भाभी के बदन को अपने बदन से घिसते हुए मैं लमण्ड पेल रहा था.
कभी वे नीचे आ जातीं … तो कभी ऊपर आकर मेरे लमण्ड पर उछलने लगतीं.
जिस वक्त वे मेरे ऊपर चढ़ कर लमण्ड ले रही थीं, तब उनके बड़े बड़े स्तनों को मैं अपने मुँह में लेकर खींच रहा था.
मैं उनके दूध को कभी हाथ में लेकर मसल देता, तो कभी दबाते हुए मरोड़ देता.
हम दोनों ने ऐसे ही बहुत देर तक रोमांटिक चुवदावई की.
इस बीच वे दो बार अपनी चूवती से कामरस भी छोड़ चुकी थीं.
वे मुझसे रुकने की कहने लगीं.
लेकिन मैं अभी झड़ा नहीं था तो मुझे भाभी की चूवती में लगातार शंटिंग करने का मन था.
तब भी मैंने कुछ पल रुक कर उनकी चूचियों को चूसा और सहलाकर भाभी को जरा सुख दिया.
वे जल्द ही अपनी कमर नीचे से उठाने लगीं तो मेरी समझ में आ गया कि भाभी फिर से चार्ज हो गई हैं.
अब मैंने अपनी गांवड को गोल गोल घुमाते हुए भाभी की चूवती में अपना पूरा लमण्ड डालकर कस कस कर शॉट लगाना चालू किया.
भाभी भी हम्म हम्म करती हुई मेरे धक्कों को झेलने लगी थीं.
कुछ ही देर में मामला चरम पर आने लगा और मेरे लमण्ड ने रस छोड़ना शुरू कर दिया.
उसी समय भाभी भी पिघलने लगीं और मैंने अपने वीर्य से उनकी चूवती को भरना चालू कर दिया.
मैं उस वक्त इतनी ज्यादा उत्तेजित अवस्था में था कि लमण्ड को चूवती में जड़ तक पेल कर रस फेंक रहा था और अपने होंठों से भाभी के होंठों को चूसते हुए उन्हें अपने जिस्म से लगभग रौंद रहा था.
शायद औरत इसी तरह से मर्द से चुवदवना और उसके नीचे पिसना पसंद करती है.
उस वक्त हमारे बदन थरथराते हुए हिलने लगे थे और हम दोनों नंगे एक दूसरे की बांहों में जकड़ कर बातें करते करते सो गए.
जब थोड़ी देर बाद हमें आराम मिल गया तो मैंने उनकी एक चूची को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और हल्के हाथ से उनकी गांवड को सहलाते हुए निप्पल को दांतों से काटने लगा.
वे आंख खोलकर मुझे देखती हुई मेरे बालों में उंगलियां फिराने लगीं.
मैंने भाभी से अलग होकर उनकी चूवती को अपनी नाक से रगड़ा और अपनी जीभ को चूवती की लकीर में डालकर चूसना शुरू कर दिया.
चूवती में जीभ का अहसास पाते ही भाभी ने अपनी दोनों टांगें खोल दीं और मेरे सर को अपनी चूवती पर दबाने लगीं.
मैंने उनकी मांसल जांघों पर दांतों से काटना शुरु कर दिया.
वे उम्म उम्म करती हुई अपनी जांघों को मेरे मुँह से अलग करने लगीं.
इसी तरह से कुछ देर में हम दोनों फिर से चुदास से भर गए और एक और पारी खेलने के लिए तैयार हो गए.
मैंने झट से भाभी की कमर में हाथ डालकर उन्हें घोड़ी बनने का इशारा किया और वे भी समझती हुई अपनी टांगें मोड़ कर चौपाया बन गईं.
मैं पीछे आ गया और उनकी गांवड को चाटते हुए चूवती तक जीभ फेरने लगा.
बीच बीच में मैं भाभी की गांवड पर जोर जोर से चमाट भी लगाता जा रहा था.
उसकी गांवड की जवानी देखकर मैं बौरा रहा था.
सच में क्या मस्त गदरायी गांवड थी भाभी की … क्या बताऊँ आपको!
आपको तो पता ही है कि मुझे भरी हुए बदन वाली भाभी आण्टी कितनी पसंद आती हैं.
मैंने भाभी की गांवड की लकीर के बीच में से लमण्ड घुसा कर घिसना शुरू किया और जोर से लमण्ड को चूवती में डाल कर गांवड को हाथ से पकड़कर हमला बोल दिया.
मैंने कचकचा कर रफ्तार से भाभी को चोदना शुरू कर दिया था.
वे मेरे इस अचानक हुए हमले से चिहुँक उठी थीं और आह आह करने लगी थीं.
मेरे हर झटके से भाभी की बड़ी बड़ी चूचियां जोर जोर से हिलती हुई हवा में झूलने लगीं.
‘फट फट पच पच …’
‘आह अह बेबी यस यस माय डियर चोदो आह और जोर से चोदो …’ ऐसी सीत्कारों से कराहती हुई भाभी अपनी गांवड आगे पीछे करती हुई मेरा साथ दे रही थीं.
मैं अपने लमण्ड को शताब्दी ट्रेन की रफ्तार से भाभी की चूवती में अन्दर बाहर करने लगा था.
वे आहें भरती हुई मजे ले रही थीं.
मैंने वैसे ही उन्हें झुकाया और उनके ऊपर से ही अपने हाथ नीचे ले जाकर उनके बड़े बड़े मम्मों को हथेलियों से मसलने लगा.
कुछ देर बाद भाभी ने लौड़े की सवारी करने की कामना जताई.
मैंने तुरंत पोज बदला.
अब वे मुझे नीचे लिटाकर मेरे लमण्ड को पकड़ कर हिलाने लगीं और मेरी आंखों में देखते हुए लमण्ड को मुँह में लेकर चूसने लगीं.
लमण्ड को बेहद मजा आ रहा था. कुछ देर बाद वे उठकर मेरे लमण्ड पर चूवती को सैट करके बैठ गईं.
जैसे ही लमण्ड सैट हुआ, वे उस पर जोर जोर से उछलने लगीं.
मैं भी भाभी की गांवड को पकड़ कर उन्हें अपने लौड़े का झूला झुलाने लगा.
कभी उनके थिरकते हुए दूध को पकड़ कर दबाते हुए चोदने लगता, तो कभी भाभी को अपनी तरफ खींच कर अपने मुँह में उनका थन दबा कर चुवदावई का मजा लेने लगता.
कुछ देर बाद भाभी थक कर हांफने लगीं और मुझसे कहने लगीं कि उन्हें नीचे ले लो.
मैंने ओके कहा और बिना लमण्ड चूवती से निकाले मैंने उन्हें अपने नीचे लिया और कचकचा कर उनकी धकापेल चुवदावई शुरू कर दी.
मैंने भाभी की दोनों टांगों को फैला कर टांगों के बीच में आते हुए सटासट दनादन अपना लमण्ड चूवती में अन्दर बाहर करना चालू कर दिया.
वे भी कामोत्तेजना में पागल की तरह छटपटाती हुई मेरी पीठ पर अपने नाखून गाड़ रही थीं और कमर उठा उठा कर मेरा लमण्ड ले रही थीं.
सच बताऊँ मुझे सेमक्ष करते वक्त अपनी पार्टनर के बदन से बदन रगड़ना बहुत पसंद है. इससे एक अलग ही अहसास और अपनापन लगता है.
पता नहीं आपको क्या लगता है … आप भी अपनी राय बताना.
हम दोनों की चुवदावई की रफ्तार अपने चरम पर आ गई थी और किसी भी वक्त विस्फोट हो सकता था.
हमारी आवाजों से पूरा कमरा गूंज उठा था.
Xxx भाभी चोदन करती हुई जोर जोर से कसमसाती हुई बके जा रही थीं- आह योगू चोद मेरी जान … आह फाड़ दे … अह आह ओह जानू …
भाभी मुझे और जोश दिला रही थीं.
कुछ ही पलों में क्षरण होना शुरू हो गया और हम दोनों ने एक दूसरे को कुछ इस तरह से भींचा हुआ था मानो हम हवा को भी अपने बीच से नहीं निकलने देने की ठान चुके हों.
हम दोनों ने निढाल होने की अवस्था में आते हुए एक दूसरे को चूमना शुरू कर दिया था और थक कर एकदम से बेहोशी की स्थिति में चले गए.
हमारी आंखें मुँद गई थीं और कब नींद के आगोश में चले गए, कुछ पता ही नहीं चला था.
उसके बाद जब नींद टूटी, तो भाभी मेरे लमण्ड से खेल रही थीं.
मैंने उन्हें अपनी ओर खींच और स्मूच करते हुए दूध दबा दिए.
वे हंस दीं और आई लव यू योगू कहने लगीं.