बस में कॉलेज गर्ल के साथ

 डर्टी गर्ल सेमक्ष कहानी में बस की यात्रा में एक जवान लड़की के साथ छेड़छाड़ और शरारतों का वर्णन है. भीड़ भरी बस में वह लड़की मेरे साथ कड़ी थी और उसमें से पसीने की गंध आ रही थी.


नमस्कार दोस्तो, मैं मोलु उर्फ शंख आपको एक ऐसी सेमक्ष कहानी बताने जा रहा हूँ, जिसे आप पढ़ कर एकदम पागल हो जाएंगे … ये मेरा दावा है. कइयों के साथ ऐसा हुआ भी होगा. ये घटना सौ प्रतिशत सच है.

अभी मेरी उम्र 24 साल की है.

यह डर्टी गर्ल सेमक्ष कहानी तब की है, जब मैं जवान हुआ ही था.

बात उन दिनों की है, जब मैं अपने नाना के साथ उनके दोस्त के घर जा रहा था.

नाना के घर से उनके दोस्त का घर करीब 70 किलोमीटर दूर होगा.

हम लोगों का ये सफ़र बस में हो रहा था.

हमें दो सीट नहीं मिली थीं, किसी तरह से एक ही सीट मिल पाई थी.

मैंने उस सीट पर नाना को बिठा दिया और मैं खड़ा हो गया.

बस में काफ़ी भीड़ थी.

बहुत सारे यात्री सफर कर रहे थे. उनमें कई लड़कियां भी थीं.

बस चल रही थी कि तभी अचानक से बस रुक गई. मैंने देखा कि एक साधारण सी दिखने वाली लड़की बस में चढ़ी और बस चल दी.

वह लड़की काफ़ी परेशान दिख रही थी. शायद वह कॉलेज जाने में लेट हो गई थी.

मैं बस में लगभग बीच में खड़ा था.

वह गेट के पास थी.

कुछ देर बस चलने के बाद फिर रुक गई.

फिर से बहुत ज़्यादा यात्री अन्दर आ गए.

यात्री पीछे से चढ़ गए थे तो मैं भीड़ के द्वारा थोड़ा आगे को धकेलता हुआ चला गया.

मुझे लोग पीछे से धक्का दे रहे थे.

उधर आगे वाले गेट से भी कुछ लोग चढ़ गए थे, जिससे वह लड़की भी पीछे को आ गई थी.

इसी सब धक्का परेड में वह लड़की मेरे काफ़ी करीब आ गई थी.

मैंने अहसास किया कि उसके बदन से पसीने की काफी बदबू आ रही थी.

चूंकि गर्मी का दिन था.

उसकी पूरी पीठ पसीने से भीगी हुई थी. उसकी गांवड का आकार सामान्य था लेकिन मम्मे कुछ बड़े से थे.

मैं उसके एकदम पीछे खड़ा था.

मेरा मन कर रहा था कि काश उसकी गांवड में मेरा लमण्ड समा जाता मगर ये तो एक सपना जैसा था.

मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं कोई बवाल न हो जाए.

वर्ना नाना जी के सामने बड़ी बेइज्जती हो जाती.

उसी समय बस ने ब्रेक मारे और मैं झटके के साथ उससे चिपक गया.

उसी दौरान मैंने उसकी गांवड में अपना लमण्ड सटा दिया.

ये सब ब्रेक लगने के कारण हुआ था.

मुझे मज़ा तो आया मगर बहुत डर गया था कि हे भगवान, ये क्या हो गया?

मैंने सोचा अब ये पक्का कुछ गाली देगी या चांटा मार देगी.

लेकिन कमाल हो गया; वह कुछ नहीं बोली.

बस फिर क्या था … मजा दोगुना हो गया.

लमण्ड उसकी गांवड में अकड़ने लगा.

वह भी मेरे लौड़े का अहसास कर रही होगी.

मगर वह उसी तरह से खड़ी रही और मेरे लौड़े को अपनी गांवड की गर्मी देती रही.

मैंने सोचा कि एक बार और झटका लग जाए तो फिर से लमण्ड उसकी गांवड में घुसेड़ दूँ.

पर बस ब्रेक नहीं लगा रही थी और मेरी खुद से हिम्मत नहीं हो रही थी.

बस अपनी गति से चलती रही.

तभी अचानक से बस रुक गई.

मैंने देखा कि फिर से बहुत से यात्री चढ़ने वाले हैं.

फिर से बहुत सारे लोगों के आने के कारण बस में भीड़ बढ़ गई और इस बार मैं उससे चिपक गया.

क्या बताऊं भाइयो, मेरा तो लवड़ा एकदम टनटनाता हुआ खड़ा हो गया था.

उसी पल एक यात्री के धक्के से मेरा लमण्ड उसकी गांवड में घुस कर छेद से टकरा गया.

मेरा शरीर तो समझो एकदम से कांप उठा.

आगे भीड़ ज्यादा होने के कारण वह मेरे लमण्ड से चिपक गई.

उधर मुझे भी पीछे से लोग धक्का दे रहे थे.

बस में हद से ज़्यादा भीड़ हो गई थी.

अब मैंने सोचा कि जो होगा सो देखा जाएगा.

मैं ऐसे ही अपना लमण्ड सटा कर रखे रहा.

मज़े की तो बात ये थी कि वह कुछ बोल ही नहीं रही थी.

अब मैं हल्के हल्के से धक्का लगाने लगा था.

मैं उस लड़की से बहुत कसके चिपका हुआ था.

उसकी गर्म और नर्म गांवड मेरे लमण्ड के आगे लज्जत दे रही थी.

तभी अचानक से कमाल हो गया.

अब वह भी कुछ कुछ हरकत करने लगी थी.

उसकी गांवड मेरे लौड़े पर घिसने सी लगी थी.

ऐसा लग रहा था उसे मेरा खड़ा लमण्ड अपनी गांवड में सटा हुआ महसूस हो गया था.

बस अपनी रफ्तार से चल रही थी.

मैंने सोचा कि क्यों न कुछ अलग किया जाए.

तो मैंने एक प्लान बनाया. मैं नीचे को बैठ गया और उल्टी आने का बहाना करने लगा.

वह कुछ असहज सी हुई और मेरी तरफ देखने की कोशिश करने लगी.

मैं नीचे बैठा रहा.

मेरे मन में तो कुछ और ही चल रहा था.

मैं सोच रहा था कि उसकी गांवड में मुँह लगा दूँ.

अब चूंकि मैं नीचे बैठ गया था इसलिए उसको अपनी गांवड में मेरा लमण्ड नहीं चुभ रहा था.

इस कारण से वह पीछे मुड़ कर देखने लगी कि मैं बैठ गया हूँ.

मैंने भी उसकी तरफ देखा और अपना सर झुका दिया.

वह आगे को देखने लगी.

मैंने सोचा कि बस अगर इस बार बस का ड्राइवर एक बार कहीं पर ब्रेक लगाता है, तो मैं इसकी गांवड में अपना मुँह दे दूँगा.

दोस्तो, ऐसा ही हुआ … थोड़ा दूर जाने के बाद बस ड्राइवर ने एक ज़ोरदार ब्रेक लगा दिया क्योंकि आगे कुछ आ गया था.

मैं सोच रहा था कि जानबूझ कर अपना मुँह उसके गांवड में सटा दूँ … लेकिन मेरा मुँह तो अपने आप जाकर उसकी गांवड से टकरा गया था.

बस में ब्रेक लगने के कारण ऐसा हुआ था.

उसी समय पीछे से एक आदमी मेरे ऊपर गिर गया मतलब उसका घुटना मेरे सर को पीछे से दबाते हुए आगे को बढ़ गया, जिससे मेरा मुँह उसकी गांवड से एकदम से पूरा चिपक गया.

दोस्तो, क्या बताऊं … इतना अधिक मज़ा आ रहा था कि बस क्या ही बोलूँ.

मैंने भी जानबूझ कर और ज़ोर लगा दिया.

उसने सलवार कमीज़ पहनी थी तो उसकी सलवार से पसीने की महक आ रही थी.

बस वापस चलने लगी.

मैंने भी अपना मुँह थोड़ा पीछे को किया और बीच बीच में अपना मुँह लगा दे रहा था.

वह समझ गई थी कि मैं क्या चाहता हूँ.

तभी बस स्टॉप आया और कुछ लोग उतरने लगे.

कुछ लोग बस में आए भी.

एक नशे में धुत्त आदमी बस में आ गया.

उसको देख कर साफ समझ आ रहा था कि उसने कच्ची शराब पी हुई है.

उसके मुँह से महुआ की बदबू आ रही थी.

लड़की उसे देख कर मेरी तरफ घूम गई.

ओह माय गॉड … क्या ही कहूँ. अब तो उसकी चूवती मेरे मुँह के सामने थी.

मेरा मन कर रहा था कि उसकी चूवती से मुँह लगा दूँ.

उसकी चूवती के एकदम पास मेरा मुँह लगा हुआ था और उसकी पेशाब की हल्की सी बास आ रही थी.

शायद उसकी चूवती मूतने के बाद उसने धोई नहीं थी इसी वजह से महक आ रही थी.

उसकी ये महक मुझे पागल कर रही थी.

मैं संयम खोता जा रहा था.

बार बार दिल कर रहा था कि अपना मुँह उसकी चूवती से सटा दूँ … लेकिन डर भी लग रहा था.

लड़की भी धीरे धीरे पीछे को जा रही थी.

वह मुझे देख भी रही थी.

मैं चुपचाप बैठा था.

उसी समय न जाने क्या हुआ कि बस के ड्राइवर ने बहुत ज़ोर से रफ्तार बढ़ा दी.

इससे बस एक झटके से आगे बढ़ गई और वह लड़की एकदम से मेरे मुँह से लग गई.

मैंने मौका देख कर अपना मुँह उसकी चूवती में सटा दिया.

दोस्तो … मैं उसकी कमीज़ के नीचे से अपना सर घुसाते हुए उसकी चूवती में घुस सा गया.

वह मेरे आगे आ गई थी मगर पीछे जा नहीं पा रही थी.

पीछे बहुत भीड़ थी, लोग उसे धक्का दे रहे थे.

उसकी दोनों टांगें फैली हुई थीं.

मैंने उसके नीचे अपना मुँह उसकी बुर के सेंटर में लगाया हुआ था.

मैंने कहानी की शुरूआत में लिखा था कि वह जब बस में दाखिल हुई थी तो बहुत परेशान लग रही थी.

मुझे अब समझ आ रहा था कि उसकी परेशानी की वजह ये थी कि शायद उसे पेशाब लगी थी.

उसे मूतने का मौका नहीं मिला होगा क्योंकि उसकी बुर की जगह थोड़ी गीली थी.

मुझे जैसे ही उसकी चूवती की जगह गीलापन महसूस हुआ, मैंने तुरंत अपनी जीभ को बाहर निकाल दिया और उसकी चूवती को अपनी जीभ से कुरेद दिया था.

मेरी जीभ को एक नर्म और मुलायम जगह का स्पर्श मिला, उससे मुझे लगा कि शायद मेरी जीभ उसकी बुर के छेद में जा लगी है और अगर मैंने जरा सी और कोशिश की तो जीभ उसकी चूवती में घुस ही जाएगी.

हालांकि चड्डी और उसके ऊपर सलवार होने के कारण ऐसा नहीं हुआ.

मगर उसकी घनी झांटें मेरी जीभ को साफ महसूस हो रही थीं.

जीभ चूवती से रगड़ने के कारण मुझे एक नमकीन स्वाद सा मिला.

वह उसके मूत का स्वाद था.

कुछ पल बाद मैंने अपना सर पीछे को किया. ये सब करीब 7-8 सेकेंड हुआ.

मेरे सर पीछे करने से वह कुछ हिलने सी लगी.

उसे लगा होगा कि मैं उठ कर उसे डाटूँगा.

मगर उसे क्या पता था कि मुझको कितना ज्यादा मज़ा आ रहा था.

अब मैंने सोचा कि फिर से एक बार ऐसा करूँ … क्योंकि बस काफ़ी हिल रही थी तो मौका जल्दी जल्दी मिल रहा था.

उसी समय एक खराब सा रास्ता आया और बस फिर से तेज तेज हिलने लगी.

लोग अपने आप आगे पीछे होने लगे.

मैंने मौका देख कर एक बार फिर से अपना मुँह उसकी बुर से सटा दिया.

इस बार मैंने महसूस किया कि उसकी सलवार और ज़्यादा गीली हो गई थी.

शायद उसे जोर की सुसू लगी थी.

अब तो उसकी पेशाब की काफ़ी ज़्यादा महक आ रही थी.

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

उसे पता चल गया था कि मैं जानबूझ कर ऐसा कर रहा हूँ.

मैंने जीभ को चूवती में फेरा तो वह तिलमिला गई.

मैं भी डर गया.

वह भी पीछे को हट गई.

मैंने सोचा कि अब तो ये मारेगी मगर वह कुछ नहीं बोली.

वह तो खुद शर्मा गई थी.

जब उसने कुछ नहीं कहा तो मैं समझ गया कि मामला उस तरफ भी गर्म हो गया है.

अब मैं खड़ा हो गया.

नाना जी मेरे बगल में बैठे थे और सो रहे थे.

आगे जाकर बस रुकी और लोग उतर गए.

नाना के बगल वाली सीट भी खाली हो गई थी.

मैं नाना जी के बगल में बैठ गया.

नाना जी खिड़की के पास बैठे थे और मैं बस की तरफ बैठ गया था.

इस बार तो भीड़ ने हद ही कर दी.

एक साथ बहुत सारे लोग चढ़ गए थे.

वह मेरे लेफ्ट साइड में मुँह किए खड़ी थी.

उसके पीछे और भी लोग खड़े थे.

अचानक से मेरी नजर गई और मैंने देखा कि वह अपना हाथ उठा कर बस का पाइप पकड़े हुई खड़ी थी.

उसने स्लीवलेस कमीज़ पहनी थी, जिसके कारण उसकी एक बगल के बाल दिख रहे थे.

यह नजारा देख कर तो मैं पागल ही हो गया.

उस डर्टी गर्ल की बगल का पसीना मेरी नाक में आ रहा था.

भीनी भीनी सी मादक खुशबू.

अचानक बस किसी वजह से मेरी साइड को झुक सी गई.

रास्ता खराब था.

फिर बस तुरंत जी दूसरी तरफ को झुकी.

खराब सड़क के कारण बस ऐसे हिचकोले ले रही थी.

मैंने सोचा कि क्यों ना मौका देख कर मैं इसकी बगल सूंघ लूँ.

इस बार मैंने पहले से ही अपनी जीभ निकाल ली.

वह लड़की मुझे देखने लगी कि मैंने ऐसा क्यों किया.

उसे क्या पता था कि मैं क्या करने वाला हूँ.

अगली बार जैसे ही बस एक साइड झुकी और उसी वजह से वह लड़की मेरे आगे को झुक गई.

उसकी बगल मेरे मुँह में पास आ गई.

मैंने जीभ फेर दी.

आह क्या स्वाद था एकदम नमकीन.

वह जीभ लगते ही झट से पीछे को हो गई.

बस रुक गई, लोग उतरने लगे.

लोग उसके पीछे से उतरने लगे और शायद कोई उसको धक्का देते हुए उतरने के लिए पीछे की तरफ गया.

धक्का लगने के कारण वह मेरी गोदी की तरफ आने लगी.

मैं इस बार भी अपनी जीभ को बाहर निकाले हुए था.

मैंने फिर से उसकी बगल को चाट दिया.

तभी बस स्टार्ट हो गई.

उसकी बगल में मेरा थूक लग गया था.

उसे पता चल गया था कि मैंने जानबूझ कर ये कांड किया है.

वह कुछ नहीं बोली लेकिन उसे अजीब सा लगा.

उसी समय कोई उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया तो वह थोड़ा सा मेरी सीट की तरफ आ गई.

कुछ पल बाद बस फिर से मेरी साइड में झुक गई.

इस बार बस 8-9 सेकेंड तक झुक कर चलती रही.

मैंने सोचा जो होगा सो देखा जाएगा.

मेरे लमण्ड से हल्का हल्का रस आ रहा था और मेरा हाथ लमण्ड के ऊपर ही था.

मैंने बिना समय बर्बाद किए अपनी जीभ को बाहर निकाल दिया.

वह लड़की अपने आप मेरी तरफ झुक गई और मेरी जीभ उसकी बगल से सट गई.

मैं जीभ फेरने लगा.

उसे गुदगुदी हुई तो वह तो हाथ उठा कर पाइप पकड़ कर सीधी होने लगी.

वह पाइप को छोड़ नहीं सकती थी क्योंकि ऐसा करने से वह गिर जाती.

मेरे जीभ लगाने से उसे काफ़ी गुदगुदी हुई थी.

वह सोच रही थी कि मैं ऐसा क्यों कर रहा हूँ.

मेरी जगह कोई और होता, तो वह पीछे हट जाता या मुँह हटा लेता.

उसकी बगल में काफ़ी तेज़ बदबू आ रही थी.

शायद औरों को पसंद ना आए मगर मुझे तो मज़ा आ रहा था.

मैं अपने हाथ से अपना लमण्ड बार बार आगे पीछे कर रहा था.

उसी वजह से मेरे लमण्ड ने पानी छोड़ दिया.

दोस्तो, पानी निकालते समय मैं काफ़ी उत्तेजित हो गया था जिसके कारण मैंने अपने होंठों से उसकी बगल के बालों को दबा लिया था.

उसके बगल में काले कलर की परत भी थी, जो कि मैल की थी.

बालों को खींचने से उसे दर्द हुआ होगा, वह पीछे हटने लगी.

वह पीछे तो हट गई मगर मुझे घूर रही थी.

वह शायद सोच रही थी कि मैंने ऐसा क्यों किया.

इधर मैंने तो ठान लिया था कि ये अगर कुछ बोलेगी, तो मैं भी जवाब दे दूँगा.

मैं अपने से उसके पास नहीं गया, वह मेरे ऊपर गिरी.

उसे तो मालूम चल गया था कि मैं बहुत हरामी टाइप का हूँ. इसलिए वह कुछ बोल भी नहीं पा रही थी.

उसे तो ये लग रहा था कि कोई ऐसी हरकत कैसे कर सकता है.

फिर बस रुकी और वह उतर गई.

दोस्तो, मेरी नाक में उसकी बगल की महक लगी हुई थी.

मैं रात भर उसकी बगल के बालों को याद करता रहा और उस दिन के बाद से मैं बस में ज़्यादा सफ़र करने लगा.

मुझे बचपन से लड़की के बालों वाली बगल देखना पसंद था.

इस घटना से पहले मैं बस में ज़्यादा ट्रॅवेल नहीं करता था.

मगर ऐसा होने के बाद मैं ज़्यादा से ज़्यादा ट्रॅवेल बस से ही करता हूँ.

कई बार तो मैं ऐसे ही बिना मतलब ही ट्रॅवेल करता हूँ क्योंकि मुझे बगल के बाल जो देखने होते हैं.